एक लैला-मजनू की दर्दभरी शायरी सुनाती है,
उनकी प्रेम कहानी को याद दिलाती है। मजनू ने दिल हर दिन लगाया था लैला के लिए, उनकी आवाज में उम्मीद की धुन बजाया था।
लैला की सुंदरता ने मजनू को चुमंतर किया, उनके प्यार के नशे में वो बेखुद हो गया। जंगलों में, रेगिस्तानों में ढूंढता रहा उन्हें, उनकी तलाश में रचा गया था लैला का गीत।
मजनू के दर्द ने उनकी आँखों को नम किया, वो दिल का जख़्म लैला के लिए सहा करता था। उनकी ज़िन्दगी में सिर्फ लैला की आस होती थी, दूसरी कोई मोहब्बत उन्हें भाती नहीं थी।
वो लैला की ख़ातिर तारीखों को भूल गया, उनकी मोहब्बत में ज़माने को मिटा दिया। लैला और मजनू की प्यार भरी कहानी, शायरों की ज़ुबानी पर अजनबी सबको भाती है।
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